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मैथुन से जुड़ी भ्रांतियां_____


आपने जब 15 वर्ष की आयु में कदम रखा होगा, तो आपके साथियों ने कभी न कभी आपसे एक सवाल जरूर किया होगा- क्‍या तुम मैथुन करते हो? यदि आप मैथुन करते होंगे तो आप शर्म से झुक गए होंगे, आंखों में पानी आ गया होगा और हां या न का जवाब देते वक्‍त अंदर ही अंदर झिझक सी पैदा हुई होगी। जरा सोचिए क्‍यों? इस क्‍यों का जवाब आपको इस लेख में जरूर मिल जाएगा।

मैथुन वो होता है जब कोई लड़की या लड़का अपने गुप्‍तांग को मसल कर यौन सुख की अनुभूति प्राप्‍त करने की कोशिश करता है। इस क्रिया में बिना किसी साथी के ही व्‍यक्ति सेक्‍स की चरम सीमा तक पहुंच जाता है। कई लोग इसे हस्‍त मैथुन भी कहते हैं, जबकि अंग्रेजी में इसका अर्थ है मास्‍टरबेशन। मैथुन में भी उसी प्रकार रति-निष्‍पत्ति होती है, जिस प्रकार संभोग के दौरान, बस फर्क अकेल पन का होता है।
यदि हम इतिहास के झरोखे में देखें तो 60 के दशक में डॉक्‍टर लोगों को मैथुन न करने की सलाह देते थे। उनका तर्क रहता था कि इससे स्‍वास्‍थ्‍य गिर जाता है, व्‍यक्ति कमजोर हो जाता है, हड्डियां कमजोर पड़ जाती हैं, उम्र कम होती है, लंबाई नहीं बढ़ती, आंखें कमजोर पड़ जाती हैं, वीर्य पतला हो जाता है (लड़कियों में अंडाणु कम हो जाते हैं), लिंग कमजोर पड़ जाता है, लिंग छोटा हो जाता है, भविष्‍य में संतान पैदा करने योग्‍य नहीं रह जाता, वगैरह-वगैरह...

तब से लेकर बीसवीं सदी तक मैथुन पर लाखों किताबें लिखी गईं। उनमें तमाम ऐसी थीं, जिनमें कहा गया कि मैथुन स्‍वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक होता है। उन्‍हीं बातों का प्रभाव आज भी दिखाई देता है। जब व्‍यक्ति टीन एज में कदम रखता है, तो उसके संगी साथी मैथुन से जुड़ी वही बातें बताते हैं। अज्ञानतावश मैथुन करने वाले कई लोग मानसिक तनाव का शिकार हो जाते हैं।

मैथुन करने वालों मन में तमाम सवाल उठते हैं, जिनके उत्‍तर वे किताबें, इंटरनेट, अखबारों और डॉक्‍टरों के पास खोजते हैं। कई बार शादी के बाद जब बच्‍चा नहीं पैदा होता है तो यह भी खयाल आता है कि कहीं इसकी वजह मैथुन तो नहीं। यही नहीं मैथुन करने वाले लड़के का दोस्‍त मजाक बनाने लगते हैं। कई बार दोस्‍त बड़ी नीची निगाहों से देखने लगते हैं, भले ही वो खुद मैथुन करते हों। इन सभी के कारण व्‍यक्ति हीन भावना का शिकार हो जाता है।

21वीं सदी में हुए अध्‍ययन और रिसर्च ने इन सभी सवालों के जवाबों को उलट कर रख दिया। दुनिया भर के चिकित्‍सकों ने इस बात कह दिया है कि मैथुन को लेकर जितनी भी बातें पहले होती आयीं हैं, वे सब महज भ्रांतियां हैं। सही मायने में तो मैथुन अकेले पन में सेक्‍स की भूख को मिटाने के लिए किया जाता है। यही नहीं शादीशुदा लोग भी मैथुन करते हैं।
वर्तमान समय में अगर मैथुन को परिभाषित किया जाए तो ये वो क्रिया है, जो सेक्‍स की भूख को मिटाती है। यही नहीं यह यौन संबंधी बीमारियों से भी बचाती है, यानी कुल मिलाकर यह सेक्‍स का सुरक्षित और आसान तरीका है।
एक अध्‍ययन के मुताबिक 70 से 80 वर्ष की आयु के पुरुष भी मैथुन करते हैं। वहीं 35 से 50 वर्ष की आयु के पुरुष उसी दौरान मैथुन करते हैं, जब उनकी संगिनी साथ नहीं होती। हालांकि 35 की उम्र के बाद लोग बहुत कम मैथुन करते हैं। हां 30 की उम्र तक सप्‍ताह में छह सात बार ता आम बात है। वहीं टीन एज में दिन में दो तीन बार मैथुन करना आम है।
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