मेरा नाम निकिता भल्ला है! मैं
दिल्ली की रहने वाली हूँ और मैं ग्यारहवीं कक्षा की छात्रा हूँ! मेरी उम्र
१८ साल है। मेरे पापा और मम्मी दोनों ही नौकरी करते हैं, एक बहु-राष्ट्रीय
कंपनी में बहुत ऊँचे पद पर हैं! पर उनके पास मेरे लिए बिलकुल
भी समय नहीं है! क्योंकि शायद मैं गोद ली हुई हूँ इसलिए ! और बाद में उन
को एक लड़का हो गया, इसलिए अब वो मुझे बोझ समझते हैं! उन्हें कोई फर्क नहीं
पड़ता, मैं घर आऊँ या ना आऊँ. . . . बस समाज को दिखाने के लिए मुझे रखना
मजबूरी है उनकी ! खैर अब मैं भी सब समझती हूँ और उनकी परवाह नहीं करती ! अब
मैं भी जिन्दगी के मज़े लेती हूँ! मेरा कद ५ फीट ३ इंच, मेरा फिगर बड़ा ही
सेक्सी है! गोल और कसी हुई चूचियाँ जो ज्यादा बड़ी नहीं पर मस्त दिखती हैं
! चूत मैं हमेशा साफ़ ही रखती हूँ! क्या पता कहाँ कोई लण्ड मिल जाये.....
रंग मेरा ऐसा जैसे कि दूध में गुलाब डाल दिया हो! मैं भी एकदम बिंदास रहती
हूँ! मेरा २-३ लड़कों से शारीरिक रिश्ता भी रह चुका है जो मेरी माँ की
रिश्ते में ही हैं.. शायद कम उम्र में ही सेक्स करने से अब मुझे लण्ड बहुत
अच्छे लगने लगे हैं! लण्ड के बारे में सोचते ही मेरी चूत में पानी आने लगता
है! अब मैं अपनी कहानी बताती हूँ! मैं रोज सुबह बस से स्कूल जाती थी और
शाम को वापिस आती थी! कई बार शाम को थोड़ा लेट हो जाती थी! क्योंकि मेरा घर
पर मन ही नहीं लगता था! आप तो जानते ही हैं कि दिल्ली की बसों में कितनी
भीड़ रहती है! पर मैं पहले स्टाप से ही बैठती हूँ सो सीट मिल जाती है! यह
एक साल पहले की बात है, ऐसे ही एक दिन मैं बस में जा रही थी! बस में बहुत
भीड़ थी! मेरे पास ही एक बड़ी उम्र का आदमी धोती कुर्ता पहने खड़ा था! कद
करीब ५ फीट १० इंच होगा! रंग थोड़ा सावंला पर था हट्टा कट्टा ! बड़ी रौबदार
मूछें ! मैंने सामने वाली सीट को हाथ से पकड़ा था इसलिए शायद गलती से मेरा
हाथ उसके लण्ड से लग गया था, मुझे अच्छा लगा। बस फिर मेरा तो पूरा ध्यान ही
वहीं अटक गया! वो बेचारा पीछे हटने की कोशिश करता हर बार! मुझे मज़ा आने
लगा, और थोड़ी हंसी भी आ रही थी! मैं अब मज़े लेने के मूड में आ गई थी!
मैंने पूरी बस में देखा- आस पास सभी औरतें ही थी, बहुत भीड़ थी, शायद सभी
के पास आज सामान कुछ ज्यादा ही था! मेरे बाजू वाली सीट पर एक लड़की बहुत
सारा सामान ले कर बैठी थी! मैंने अपना बैग अपनी टांगों पे रख लिया! अ़ब मैं
आगे झुक के सोने का नाटक करने लगी और हाथ को आगे वाली सीट के पाइप पे रख
के जरा बाहर निकाल लिया, पर वो थोड़ा पीछे हो गया! पर झटकों से कभी कभी उसका
लण्ड मेरी उंगलियों से छू जाता था! अब मुझे मज़ा आने लगा.. मेरी चूत में
खुजली होने लगी थी! मैंने नीचे ही नीचे अपनी शर्ट के ऊपर के बटन खोल लिए ओर
पीछे हो कर बैठ गई! अब ऊपर से मेरी सफ़ेद ब्रा और गोल गोल चूचियां साफ़ दिख
रही थी! मैंने अपने बैग को पेट से चिपका लिया ताकि मेरी चूचियां थोड़ी और
ऊपर उठ जाएँ और बाहर ज्यादा नज़ारा दिख सके.. मैं नोट कर रही थी कि वो आदमी
मुझे देख रहा है पर जब भी मैं ऊपर देखती हूँ तो वो नज़रें घूमा लेता है!
शायद उसे अपनी बड़ी उम्र का अहसाह था! पर मुझे तो मस्ती सूझ रही थी! मुझे
और शरारत सूझी और मैं बाहर स्टैंड देखने के लिए थोड़ा उठी और चुपके से साइड
से अपनी स्कर्ट सीट के पीछे अटका दी और बैठ गई! जैसे ही मैं बैठी, मेरी
स्कर्ट ऊपर उठ गई और मेरी पैंटी दिखने लगी, जो कि बहुत पतली थी! पैंटी में
से मेरे चूत के होंट साफ़ दिखाई देते थे! मैं झट से दोबारा उठी और स्कर्ट
ठीक कर के बैठ गई, जैसे गलती से स्कर्ट अटक गई हो.. पर जो मैं दिखाना चाहती
थी, वो उस आदमी ने देख लिया था! मैंने उपर देखा और हल्के से मुस्करा दी!
मैंने महसूस किया कि उस आदमी का लण्ड टाइट होने लगा था। वो अब भी कुछ शरमा
रहा था पर मैंने हाथ को सामने वाली सीट पे ही लगा के रखा था! जब भी कोई
उतरता था तो उसे आगे होना पड़ता था ओर मेरा हाथ उसके लण्ड से छू जाता था!
तभी बस में और भीड़ चढ़ गई! अब तो बस खचखच भरी थी! तभी मैंने देखा के पास
में एक औरत सामान के साथ खड़ी थी! मुझे एक आइडिया आया और मैंने उसे अपनी सीट
दे दी! अब मैं उस आदमी के सामने खड़ी हो गई! मेरी सीट पे वो औरत बैठ गई,
उसकी गोद में सामान था और उसने मेरा बैग भी अपनी गोद में रख लिया था! बस
फिर चल पड़ी! अब मेरा ध्यान उस आदमी के लण्ड पे था! मुझे उस आदमी का लण्ड
अपनी गांड के थोड़ा ऊपर महसूस हो रहा था! मैंने एड़ियों को थोड़ा ऊपर उठा लिया
ताकि लण्ड मेरी गांड की दरार में लग जाये! वाह... क्या लण्ड था उसका! मैं
उसके लण्ड का जायजा लेने लगी..जिससे मेरी चूत में पानी आने लगा था! पर वो
आदमी कोई हरकत नहीं कर रहा था! अब मुझे उस पे गुस्सा आ रहा था! अ़ब मैं
काफी गरम हो चुकी थी! तब मैंने थोड़ी हिम्मत करके हाथ धीरे से पीछे ले जाकर
उसके लण्ड को छुआ! मैं उसे सहलाने लगी जिससे वो और कड़क हो गया! मुझे मज़ा
आने लगा। मैं उसके लण्ड को हल्के- हल्के से सहला रही थी, पर तभी उसने मेरा
हाथ अपने लण्ड से हटा दिया! मैंने पीछे मुड़ के देखा, वो चुपचाप था पर आगे
की ओर आ गया था! अब वो अपना लण्ड मेरी गांड की दरार में दबा रहा था! मुझे
खुशी हुई कि वो अब मेरा साथ दे रहा था! मेरी स्कर्ट में साइड में चैन थी!
सो मैंने धीरे धीरे स्कर्ट घुमाना शुरु कर दिया! मैं साथ साथ बस में भी नज़र
मार रही थी कि कोई देख तो नहीं रहा है! पर शायद भीड़ होने की वज़ह से कोई
नहीं देख पा रहा था! अब मेरी स्कर्ट की जिप पीछे थी जो मैं पहले ही खोल
चुकी थी! उसका लण्ड अ़ब मैं और अच्छे से महसूस कर सकती थी! कुछ देर ऐसे ही
चलता रहा, हर झटके के साथ वो अपने लण्ड का दबाव और बढ़ा देता! मुझे मज़ा आ
रहा था! मैंने पीछे मुड़ के देखा पर वो ऐसे देख रहा था जैसे कुछ हो ही नहीं
रहा था! मैं अ़ब और आगे बढ़ना चाहती थी, इसलिए अ़ब मैंने पीछे हाथ कर के
उसकी धोती में हाथ डाल दिया और उसके लण्ड को बाहर निकालना चाहा पर उसने
मेरा हाथ झटक दिया! मैंने उसकी ओर देखा, वो हल्के से मुस्कराया और उसने बस
में होने का अहसास कराया! मैंने धीरे से पीछे हट के उसके कान में कहा,"इतनी
भीड़ में कोई नहीं देख रहा, अभी भीड़ कम नहीं होगी बल्कि और बढ़ेगी, मैं
रोज़ इसी बस मैं जाती हूँ, तुम बस मज़ा लो !" और मैं उसकी तरफ मुस्करा दी..
जवाब में उसने भी एक प्यारी से मुस्कराहट दी.. . वो थोड़ा शरमाया और ऐसे ही
लण्ड को दबाता रहा! मैंने सोचा- चलो कोई नहीं ! इतना मज़ा तो आ रहा है! पर
थोड़ी देर बाद मैंने महसूस किया कि वो अपनी धोती में हाथ डाल रहा है! तभी
मैंने अपनी पैंटी पे उसका लण्ड उठा हुआ महसूस किया! मैं फिर से ऊपर उठ गई
ताकि लण्ड मेरी गांड की दरार में लग जाये! मैं बार बार ऊपर उठ रही थी, यह
बात उसने भांप ली, सो उसने मेरी एड़ियों के नीचे अपने पैर लगा दिए, जिससे वो
मेरे और पास आ गया और मैं ऊपर उठ गई! मैंने आगे देखा तो मेरे सामने सामान
ही सामान था, मैंने चुपके से अपनी स्कर्ट ऊपर उठानी शुरु कर दी पर एक लिमिट
से ज्यादा नहीं उठा सकती थी, नहीं तो किसी को पता चल जाता! इसलिए स्कर्ट
को वापिस नीचे ही कर दिया! पर मेरा मन तो पूरे मज़े लेने का था! मैं थोड़ा
आगे की तरफ हो गई ताकि उसके और मेरे बीच कुछ गैप बन जाए। मैंने अपनी टांगो
को थोड़ा फैला लिया! अब मैंने पीछे हाथ ले जा कर उसके लण्ड को अपने स्कर्ट
की जिप से दोनों टांगो के बीच में फंसा लिया! यार क्या गरम लण्ड
था.......स्स्स्स्स्स्स्स्स्स......म्मम्मम........... मैं उसका लण्ड अपनी
दोनों टांगो पे महसूस कर रही थी! ऐसा लगता था कि मैं किसी बड़ी मोटी गरम
रॉड पे बठी हूँ! मैंने अपनी गाण्ड थोड़ा पीछे धकेल दी और वो भी थोड़ा आगे आ
गया! उसका लण्ड मेरी टांगों पे रगड़ता हुआ आगे आ गया! अब उसके लण्ड का आगे
वाले हिस्से का उभार स्किर्ट पे आगे की साइड दिख रहा था, इसलिए मैं थोड़ा
आगे झुक गई ताकि स्कर्ट ऊपर उठ जाये! "म्मम्मम्म......... उसका गरम लण्ड
मैंने टांगों के बीच दबा रखा था जो कि हर झटके में आगे पीछे हो रहा था! एक
तरह से वो मेरी टांगों को चोद रहा था, मेरी पैंटी पूरी गीली हो चुकी थी!
मेरा मन हो रहा था कि अपनी पैंटी को हाथ डाल के हटा दूँ ताकि उसके लण्ड की
गर्मी अपनी चूत पर महसूस कर सकूँ! पर शायद बस में यह नहीं हो सकता था! मैं
पीछे मुड़ी और उसके कान में धीरे से कहा," अपने हाथ से मेरी पैंटी साइड में
कर दो प्लीज़...!" और वापिस आगे देखने लगी। उसने अपना हाथ नीचे ले जाकर
स्कर्ट की जिप से २ उँगलियाँ अंदर डाली ओर मेरी पैंटी को साइड में कर दिया!
मैं तो जैसे ......... अपने होश ही खो बैठी थी! उसका गरम लण्ड मेरी चूत पे
लगा हुआ था। अब उसका लण्ड मेरी चूत पे रगड़ खा रहा था, शायद चूत के पानी
की वज़ह से जो मेरी टांगों तक आ गया था, वो अ़ब आराम से आगे पीछे जा रहा
था! मेरी आँखे बंद हो रही थी! मेरा चेहरा लाल हो गया था पर मैं सामान्य
दिखने की कोशिश कर रही थी! मैंने आस पास देखा पर कोई भी हमारी तरफ नहीं देख
रहा था! बस के हर झटके के साथ वो मेरी टांगों में झटके मार रहा था! उसका
गरम लण्ड जब भी आगे या पीछे होता मेरी चूत में आग बढ़ जाती! तभी एक तेज़
झटका लगा और उसका लण्ड पीछे चला गया, आगे से मेरी पैंटी थोड़ा अपनी जगह पर
वापिस आ गई! जब उसने लण्ड वापिस आगे किया तो वो मेरी पैंटी में चला गया
म्म्म्म्म्म्म्म...................................... अब उसका लण्ड मेरी
पैंटी में था और चूत के होठों के बीच में ..... ऊपर नीचे हो रहा
था..........! मुझे और मज़ा आने लगा, ... और मैंने एड़ियों को और ऊपर उठा
लिया। शायद उसे भी मज़ा आ रहा था इसलिए उसने झटके बढ़ा दिए। तभी बस रेड लाइट
पे रूक गई और झटके बंद हो गए! मैंने पेट के नीचे खुजली करने के बहाने से
हाथ स्कर्ट पे ले जा के उसके लण्ड के सुपाड़े को मसलने लगी! मैंने पीछे मुड़
के देखा तो उसका पूरा चेहरा पसीने से गीला हो गया था! तभी बस चल पड़ी पर
मेरे मसलने से शायद वो झड़ने वाला था। अब मैं भी अपनी गाण्ड को हल्के हल्के
ऊपर नीचे करने लगी! स्स्स्स्स्स्स्स्स्श्ह्ह्ह्ह्ह्ह्छ मज़ा बढ़ने लगा
था... मेरी चूत में कैसे खलबली मच गई थी...... तभी मैंने एड़ियों को ऊपर उठा
लिया और मेरा शरीर टाइट हो गया ! मैं .....में.......झड़ने वाली थी, और
....औ ..औम्मम्मम... औ..आह्ह्ह्छ ..... में उसके ऊपर झड़ गई और मेरा सारा
जूस उसके लण्ड पे आ गया! और मैं ढीली होती चली गई! उसने भी एक दो झटके
लगाये और सारा वीर्य मेरी पैंटी में छोड़ दिया, जिसे में अपनी जांघों तक
महसूस कर रही थी! २-३ मिनट तक हम ऐसे ही रहे और फ़िर वो अपना लण्ड बाहर
निकलने लगा। मैंने अपना हाथ पीछे लगा लिया ताकि उसके वीर्य से मेरी स्कर्ट
ख़राब न हो! सारा वीर्य मैंने अपने हाथ से पौंछ लिया और उसने अपना लण्ड
वापिस अपनी धोती में कर लिया! तभी एक स्टाप आया और मैं उतर गई, पता चला कि ४
स्टाप आगे आ गई हूँ पर इस स्टाप पे ज्यादा लोग नहीं होते क्योंकि यह
दिल्ली का बाहरी इलाका था, और आज तो ये स्टाप बिल्कुल खाली था, पता नहीं
क्यों... शायद हमारी किस्मत......... वो आदमी भी वहीं उतर गया! मैंने इधर
उधर देखा, फिर उसकी तरफ देख के अपने हाथों को चूसने लगी चाट -चाट के सारा
हाथ साफ़ कर लिया! तब थोड़ी देर बात करने के बाद उसने बताया कि वो यहाँ से ८०
किलोमीटर दूर गाँव में रहता है, यहाँ अपने बेटे के पास आया है, पूरा दिन
खाली रहता है इसलिए सोचा आज एक दोस्त से मिल आऊँ, उसका नाम महादेव सिंह है।
मेरा भी स्कूल मिस हो गया था सो हम बस स्टाप के साथ में बने पार्क में गए
और एक पेड़ों से घिरी जगह बैठ गए! वहाँ पहले तो मैंने अपनी पैंटी में हाथ
डाल के सारा वीर्य हाथों से साफ़ किया और हाथों को चटकारे ले ले कर चूसना
शुरु कर दिया..! पर किसी के आने की आहट से हम सतर्क हो गए, वहाँ पार्क में
कुछ दूर कुछ लोग आ के बैठ गए थे और शायद उनका लम्बे समय तक बैठने का
कार्यक्रम था! इसलिए हम कल फिर वहीं मिलने का वादा कर के वापिस चल पड़े
क्योंकि उसे भी कुछ जल्दी थी! वो शायद अपने दोस्त के घर के लिए चला गया और
मैं अपनी बस की प्रतीक्षा करने लगी.. और बस पकड़ के अपने घर आ
गई...................... आगे क्या हुआ बाद में....
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